Friday, April 15, 2022

उसने जाना

 उसने जाना

घर की सांकल खटखटाती

दुकानों की मंशा को


उसने पहचाना

पैकेटों-ठण्डी बोतलों में बंद

ज़हरीली गंध को


समझा उसने

सिक्कों की खनखनाहट में छिपे

ध्वनि- संकेतों को


आखिर भॉंप ही लिया उसने

चकाचौंध कर देने वाली

रोशनियों का मर्म


लेकिन....

तब तक वह

बूढ़ा हो चला था

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